‘Dil ki Awaaj’ and ‘Dil ki Baat’ – by Keshav Kumar Jha

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काश ये सब ऐसे होता… – By Akshobhya Bellurkar

मेरे अंदर आग लगाकर , वो जो इतना खामोश है,
काश वो भी होता, जितना मेरा दिल मदहोश है ,
मेरे अंदर रहने वाले काश तेरे अंदर मै भी होता ,
काश ये सब ऐसे होता ….

ख्वाहिशो मे मै चलता हु ,ख्वहिशो मे तु चलता है ,
मुझको तेरी इकतर्फा ख्वहिश, शायद मुझको ये खलता है ,
मेरे ख्वाबो मे बसने वाले काश तेरे ख्वाबो मे मै भी होता
काश ये सब ऐसे होता ….

काफी कुछ आता है दोनोको ,काश सताना नही आता,
मुझे छुपाना नही आता, तुम्हे जताना नही आता,
काश मेरी रुसवाई पे मुझे मनाने तु होता ….
काश ये सव ऐसे होता …

तुझको बाहों मे थामना ,ये तो मेरी आदत है ,
मुझे गले लगाना, काश तेरी फितरत मे होता,
मेरी जन्नत खुद बननेवाले ,काश तेरी मन्नत मै होता
काश ये सब ऐसे होता ….

काफी बंधन है दुनिया मे ,काश मेरी जमानत तु होता,
काबिल हो जाता खुदके ही मै,जो मेरी अमानत तु होता,
काश मेरी हर पंक्ती का भाव तुझे समझ आता,
काश ये सब असे होता …..
काश ये सब ऐसे होता …..

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लडकी – By Vivek Loya

आज य़हा कल वहा हाहाकार हुआ….

आज इसका कल उसका बलात्कार हुआ…

छौंड दो गिन्ना अब उँग्लिओ पे…

आज बाहर तो कल घर मै शिकार हुआ…

 

क्यु मुँह छिंपाके भागे सोपके हवाले उनके…

क्यु ना रुके बोला की मुझपे वार कर पेहले उनके…

फीर क्यु अपना पन बादमे जताया…

जब साथ देना ही न हीं था तो क्यु तसली देके सताया…

 

लडकी बनगयी ये गुनहा था मेरा…

दरीन्दो को मोका मिला ये आशिर्वाद था उसका…

हस हस्के जब किया मेरा शोशन…

कर दिया तुमने तो आज देश का नाम रोशन…

 

सलाम है कालियत पे तुमहारे…

जब सोशन कर सकते हो दिनदहाडे हमारे…

क्या तुम्हरी मा क्या तुम्हरी बहन अब सब पे हख है तुमहारा…

हर रोज़ एक आता है तब भी मोमबतियो से जयादा ना कुछ हो पाता है….

 

कुँछ टी.वी. का तो कुँछ फ़िल्मो का हाथ बताते है…

कुँछ लडकीयो के पेहनावे का दोश बताते है…

ये तो तरीके है अपनी गलतियो को छीपने का वरना…

कहा लोग आपने को भेडीये बताते है…

पिघलता है मोम और जलता है ढागा…

लडकी का बाप रेह्ता है पूरी रात जागा…

कौन जाने फ़िर किसकी बेटी के लिये जलेगी मोमबती…

करे तो क्या करे वो बेचारा अभागा….

 

आज केह्ता हूँ मे ये वचन…

ना कभी होने दुनगा किसीका सोशन….

करता हूँ हिम्मत को तेरे नमन…

दुनगा साथ तेरे हर जनम…

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सीख -By Ram Dhobley

ना रोक अपने क़दमों को तू,
मंजिल की ओर बढ़ने से,
रुके हुए झरने को मैंने,
अक्सर सड़ते देखा है…

ना सोच कोई क्या कहेगा,
रख तू बस ख़ुदपर यक़ीन,
मैंने कुत्तों को भी अक्सर,
बेवज़ह भौंकते देखा है…

ना सोच के काबिलियत ही,
काफी है उड़ने के लिए,
कई परिंदों को भी मैंने,
सिर्फ चलते हुए देखा है…

रह डटा तू अपने दम पर,
हौसला रख बेमिसाल,
के पेड़ों को तूफाँ के आगे,
मैंने झुकते देखा है…

ना कर नक़ल पर तू कभीभी,
किसी और के अरमानों की,
बन्दर के नाम को भीे मैंने,
गालियों में देखा है…

न भूल कभी तू कौन है,
और क्या है तेरी खूबियां,
कई दफ़ा शेरों को मैंने,
पिंजरेमें पलता देखा है…

आया है जो इंसान बनके,
छोड़ जा कुछ अपने पीछे,
के पत्थरों को भी मैंने यहाँ,
भगवान बनते देखा है…

मैंने वक़्त बहते देखा है…!

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